Monday, 6 June 2016

अजगर करे न चाकरी.........सबके दाता राम!


जय श्री राम....!
अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम
दास मलूका कह गए, सबके दाता राम!
तुलसी दास जी कहते हैं:
सियाराम मय सबजग जानी!
करहुँ प्रणाम जोरि जुग पानी...!!

राम कौन हैं? राम यह सारा अस्तित्व है। "सबजग जानी".... 
समस्त अस्तित्व, सारा ब्रह्माण्ड ही रामरूप है। 
अस्तित्व क्या है? जिसमें अस्ति का गुण है यानि "जो है"।
सारा अस्तित्व, सारी दुनिया, सारा ब्रह्माण्ड ही राम हैं..
राम ही दिख रहे, राम ही सुनाई पड़ रहे..रूप, रस, स्पर्श, गंध, 
ध्वनि के द्वारा इनकी ही प्रतीति हो रही और जो इन सभी से परे हैं
वह भी राम ही हैं!
जय श्री राम....!!
अन्य आध्यात्मिक एवम् श्री कृष्ण, भगवत गीता और महाभारत से सम्बंधित और पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:-




Tuesday, 31 May 2016

शिव और कृष्ण


शिव परमात्मा के
आत्म रूप में प्रकट हैं..
शुद्ध रूप में प्रकट हैं..
कृष्ण परमात्मा की
लीला रूप में प्रकट हैं..
व्यवहार रूप में प्रकट हैं..
ॐ नम: शिवाय...!
जय श्री कृष्ण...!

अन्य आध्यात्मिक एवम् श्री कृष्ण, भगवत गीता और महाभारत से सम्बंधित और पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:-

Monday, 30 May 2016

जीव को जानें, शिव को जानें.. जगत का कल्याण करें


जीव ही शिव है...!
जबतक जीव शरीर में है
तबतक शरीर का कल्याण है!
परिवार, समाज, देश, दुनिया 
का कल्याण सम्भव है
इसी शरीर, मन, बुद्धि के द्वारा...!
शिवयोग साधना से जीव का साक्षाकार
करके अपरा और परा प्रकृतियों को वश में कर
संसार का कल्याण करें...!
*
ॐ नमः शिवाय...!
ॐ नमः जीवाय....!
***
***
Soul is Shiva...!
Up till soul remain in body
Body is survived, saved, welfared
in all ways. We can do wwelfare, serve our
family, society, nation, world only till soul existing
in the body, using our same body, mind n intellect.
Let us Realize our Soul by Siyag Sadhana and have 
Control over both Pra and Apradh Natures and 
Serve the world, do all every things for welfare of world.
Om namah shivay...!
Om namah jeevan....!
***

अन्य आध्यात्मिक एवम् श्री कृष्ण, भगवत गीता और महाभारत से सम्बंधित और पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:-

Thursday, 24 March 2016

भगवत गीता और कृष्ण


गीता में श्रीक्रष्ण अपने सखा, शिष्य, प्रिय अर्जुन को कहते हैं-
"हे अर्जुन! जो ज्ञान मैनें सृष्टि के आरम्भ में सूर्य को कहा था, वही
ज्ञान, वही परमज्ञान आज तुझे मैं कह रहा हूँ." –
यह घोषणा उस शरीर नाम से
जाने जाने वाले कृष्ण,
जिस शरीर के जनक वसुदेवजी हैं, जननी देवकीजी हैं-
उस शरीर की यह घोषणा नहीं है.
यह घोषणा करने वाला परमात्मा (परम् आत्मा) हैं,
ईश्वर हैं , सर्वेश्वर हैं, परमेश्वर हैं,
या किसी भी नाम से जाना जाने वाला,
किसी धर्म के अनुआयियों द्वारा माना या
जाना जाने वाला-
सर्वव्यापी, सर्वकालीन, सर्वज्ञ, सर्वातीत, सर्वलिप्त, सर्वालिप्त- परम
अस्तित्व की है, अनंत अस्तित्व की है.

पूरा पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:-
http://sribhagwatgeeta.blogspot.com


**********

Thursday, 17 March 2016

गीता महागीत है! श्रीमभ्दगवग्दीता, अध्याय:०१/श्लोक:०१/पोस्ट:०१ Sri Bhagwat Geeta Adhyay 01 Sloka 01 Post 01


गीता महागीत है, महासंगीत है. ज्ञानगीत है, अध्यात्मगीत है.
गीता कोई कथा-कहानी जैसी नहीं है. गीता विशुद्ध ज्ञान है, सत्य-ज्ञान है.
सर्वोपयोगी, सर्वोत्कृष्ट है, ज्ञान का महासागर है गीता.
**
!!श्रीमभ्दगवग्दीता, अध्याय:०१/श्लोक:०१/पोस्ट:०१!!
!!ॐ नमो भगवाते!!
परमगीत पुनीता: भगवत गीता!
गीता महागीत है, महासंगीत है. ज्ञानगीत है, अध्यात्मगीत है.
गीता कोई कथा-कहानी जैसी नहीं है. गीता विशुद्ध ज्ञान है, सत्य-ज्ञान है.
सर्वोपयोगी, सर्वोत्कृष्ट है, ज्ञान का महासागर है गीता.

यह हर काल के, हर जाति के, हर वंश, गोत्र, धर्म, सम्प्रदाय, संघ के
मनुष्यों के लिए आत्मा सदृश्य अमृत है, अनैश्वेर है, शास्वत है.

गीता में श्रीक्रष्ण अपने सखा, शिष्य, प्रिय अर्जुन को कहते हैं-
"हे अर्जुन! जो ज्ञान मैनें सृष्टि के आरम्भ में सूर्य को कहा था, वही
ज्ञान, वही परमज्ञान आज तुझे मैं कह रहा हूँ." –
यह घोषणा उस शरीर नाम से
जाने जाने वाले कृष्ण,
जिस शरीर के जनक वसुदेवजी हैं, जननी देवकीजी हैं-
उस शरीर की यह घोषणा नहीं है.
यह घोषणा करने वाला परमात्मा (परम् आत्मा) हैं,
ईश्वर हैं , सर्वेश्वर हैं, परमेश्वर हैं,
या किसी भी नाम से जाना जाने वाला,
किसी धर्म के अनुआयियों द्वारा माना या
जाना जाने वाला-
सर्वव्यापी, सर्वकालीन, सर्वज्ञ, सर्वातीत, सर्वलिप्त, सर्वालिप्त- परम
अस्तित्व की है, अनंत अस्तित्व की है.

यह घोषणा उसी अनंत परम् अस्तित्व की है:
"सृष्टि के आरंभ में मैंने जो ज्ञान सूर्य को कही थी वही ज्ञान है
अर्जुन! उसी ज्ञान को मैं आज तुझसे कह रहा हूँ." यह कहना, यह घोषणा विराट
परम् अस्तित्व की है
जो पूर्ण रूप में वसुदेवजी के पुत्र श्रीकृष्णजी के मुखारविंद से की जा रही है.

परमात्मा हर काल में, हर युग में, हर अर्जुन के समक्ष अपने संपूर्ण रूप
में, विराट रूप में प्रकट होता है,
गीत गाता है, गीता को प्रकट करता है, महाज्ञान को प्रकट करता है,
आत्मज्ञान को, प्रमात्मज्ञान को अभिव्यक्त करता है.
यहीं श्रीकृष्ण के द्वारा उपरोक्त घोषणा में श्रीकृष्ण के कहने के भाव
हैं- मेरी समझ से.

गीता महाअध्यात्म है, महागीत है, महाकाव्य है.
समस्त जगत की उत्पति, सञ्चालन प्रकृति और विनाश प्रकृति के अनंत गूढ़तम
रहस्यों को प्रकट कराती है-गीता!
जङ जगत, चेतन जगत, अंतर्चेतन जगत,
अतिचेतन जगत-
सबों का विज्ञान और मनोविज्ञान संपूर्ण और स्पष्ट रूप
आलोकित की है परमात्मा ने, श्रीकृष्ण ने:
सर्वकाल के मनुष्यों के लिए श्रीमभ्दगवग्दीता में, श्रीगीता में.!!
श्रीगीता के श्लोकों में एक शब्द भी अनावश्यक नहीं कहा गया है.
सार्थक हैं, परमार्थक हैं, रहस्यमयी हैं सारे शब्द गीता के सारे श्लोकों के.

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समावेता युयुत्सवः!
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय!!

क्रमश:....!!श्रीमभ्दगवग्दीता, अध्याय:०१/श्लोक:०१/पोस्ट:०२!! में 
!!ॐ नमो भगवाते!!

श्रीमभ्दगवग्दीता-मेरी समझ में **श्रीमभ्दगवग्दीता के श्लोकों पर टीके **कृष्ण नहीं आये..- इक्कीस वर्षों तक लिखी जाने वाली बहुत ही लम्बी कल्प-सत्य धारावाही कहानी..**महाभारत पर समसामयिक उपयोग दृष्टि **श्रीमभ्दगवग्दीता में श्री कृष्ण के अनमोल वचन..तथा अन्य आध्यात्मिक और साहित्यिक अभिब्यक्तियाँ आदि पढ़ने के लिए नीचे का लिंक क्लिक करें:-
http://sribhagwatgeeta.blogspot.com
--***--


Thursday, 10 March 2016

हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! (भजन और भाव)



*
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
हे कृष्ण समझा दो ना, हमें तू अपनी गीता;
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
शुद्ध आध्यात्मिक, शुद्ध वैज्ञानिक महागीत पुनीता;
हे कृष्ण समझा दो ना, हमें तू अपनी गीता;
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
**
अर्जुन सा एकाग्र नहीं हैं,
बुद्धि तीव्र कुशाग्र नहीं है;
महाबली ना महाबाहो हैं,
हम सब हैं भयभीता;
हे कृष्ण समझा दो ना, हमें तू अपनी गीता;
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
***
हम तो बड़े कमजोर मनुज हैं,
असहाय मजबूर मनुज हैं;
कदम कदम पे हम हैं फिसलते,
और हैं बड़े पतिता;
हे कृष्ण समझा दो ना, हमें तू अपनी गीता;
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
****
तुम समर्थ बस और न कोई,
दुष्ट दमन कर सके न कोई;
धृतराष्ट बन बैठे हैं सब,
मोह ने इनको है जीता;
हे कृष्ण समझा दो ना, हमें तू अपनी गीता;
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
*****
हम सब भी हैं मोह के वश में,
काम, क्रोध, मद, लोभ के वश में;
पर हम गिरे हैं चरण तुम्हारे,
उठा लो हमको मीता;
हे कृष्ण समझा दो ना, हमें तू अपनी गीता;
हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
*******

Monday, 7 March 2016

शिवरात्रि की शुभकामनायें!!


हे जगत पिता और जगदम्बे....!!
*
हे नाथ भोले बाबा, हे नाथ त्रिपुरारी...
हे मात सिंहवाहिनी, हे मात तू हमारी!
शिवरात है बारात है
कल्याण का सौगात है
प्रेममय साथ है…....
शिवनाथ की छवि न्यारी……
हे नाथ भोले बाबा, हे नाथ त्रिपुरारी...
हे मात सिंहवाहिनी, हे मात तू हमारी!
*

शादी करते हमें दिखने को
प्रीत की रीत सिखाने को
इस बात से जगाने को
एक रहष्य बताने को...
शिव शक्ति एक है
हर जीव के भीतर...
सिर्फ जरूरत है
जगाने का.....
शिव तंत्र बताये 
हमें जगाने को..!
कि सारी शक्ति है तुम्हारी....!
हे नाथ भोले बाबा, हे नाथ त्रिपुरारी...
हे मात सिंहवाहिनी, हे मात तू हमारी!

शिवरात्रि की शुभकामनायें!!