Saturday, 24 December 2016

श्रीमद् भगवद् गीता महा गीत है, ज्ञान गीत है


गीता महागीत है, महासंगीत है. ज्ञानगीत है, अध्यात्मगीत है.
गीता कोई कथा-कहानी जैसी नहीं है. गीता विशुद्ध ज्ञान है, सत्य-ज्ञान है.
सर्वोपयोगी, सर्वोत्कृष्ट है, ज्ञान का महासागर है गीता.

श्री कृष्ण, भगवत गीता और महाभारत से सम्बंधित और पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:-
http://freehindiquotes.blogspot.com



Friday, 23 December 2016

हमसब के सामने आते हैं कृष्ण


जय श्री राधे जय श्री कृष्ण.....!!
हमसब के सामने आते हैं कृष्ण
मुरलिया बजाते  हैं कृष्ण
हमसब के सामने आते हैं कृष्ण....!
वो विराट हैं वो असीम हैं
महा शून्य और राम रहीम हैं
लघु रूप दिखाते हैं कृष्ण..
हमसब के सामने आते हैं कृष्ण....!
जय श्री राधे जय श्री कृष्ण.....!!
*****

श्री कृष्ण, भगवत गीता और महाभारत से सम्बंधित और पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:-
http://freehindiquotes.blogspot.com

Saturday, 29 October 2016

नमस्कार का आनंद* Bliss of Salute


***नमस्कार का आनंद***
नमस्कार की मुद्रा में आनंद ही आनंद है.. बढ़ते जाएगा आनंद जैसे जैसे आप हाथ ऊपर करते जाएँगे.. अनाहद.. विशुद्ध.. आज्ञा.. सहस्रसार चक्रों में...!
***
परमात्मा को भी याद करना है तो किसी व्यक्ति के रूप में ही किया जा सकता है.. व्यक्ति यानि जो व्यक्त हो आपके समक्ष, अभिव्यक्त हो आपके समक्ष.. किसी भी माध्यम से...!
***०***
***भीतर की सफाई***

दीपावली के समय जब हम सफाई करने लगते हैं तब पता चलता है कि कितनी गंदगियाँ जमा हो गईं थी... पता नहीं कितने जन्मों से अपने भीतर गए भी नहीं हैं हम, सफाई की बात तो दूर.. पता नहीं कितनी गंदगियाँ भीतर जमा हैं और सफाई में कितने जन्म लगेंगे, जबकि गंदगी दिनोदिन बढ़ती ही जा रही...! भीतर की गंदगी साफ करते रहना चाहिए सबेरे शाम साधना करते रहना चाहिए।
***

***अँधयुद्ध***
कल रात्रि साधना में, किसी अज्ञात शक्ति ने मेरे द्वारा महाकाल शक्ति को आदेश दिए कि एक वर्ष तक पूरी पृथ्वी पर हर स्तर पर अँधयुद्ध का आयोजन करे !
॥ जय माँ काली ॥
***
आज पृथ्वी पर की सभी समस्याओं का समाधान एक मात्र युद्ध ही है.. श्री कृष्ण का अवतरण हमेशा धर्मयुद्ध के लिए होता है.. मगर इस काल में न कौरव हैं न पाण्डव.. सिर्फ धृतराष्ट हैं.. प्रजातंत्र में हर कोई प्रजा और राजा दोनों एक साथ है.. लेकिन हर कोई मोहान्ध है... तो अँधयुद्ध के बाद ही स्पष्ट हो सकता है कि कौन शुभ के पक्ष से लड़ेगा धर्मयुद्ध में और कौन अशुभ के पक्ष से.. कौन-कौन कौरव हैं और कौन-कौन पाण्डव...!
***
जगत ही झूठ है, प्रपंच है, माया है, सपना है.. तो इसमें झूठ बोलिए या सच क्या फर्क पड़ता है..! फर्क सिर्फ इस बात में है कि झूठ या सच जो भी बोला जाता हो उसके पीछे उदेश्य क्या है...!
***०***
(Date- 28.10.2016)




Friday, 28 October 2016

श्री कृष्ण का धर्म * Religion of Sri Krishna*


***श्री कृष्ण का धर्म***
श्री कृष्ण का एक ही धर्म था- अशुभ का दमन किसी भी प्रकार से और आज भी पृथ्वी पर एक यहीं धर्म सच्चा धर्म माना जाएगा...!
***
मैं उसे ही शुभ कह सकता हूँ जो अशुभ का विरोध, दमन करे.. अशुभ से युद्ध करे...!
***०***

***साधना और समर्पण***
बुद्ध, महावीर, मीरा जैसा मैं संकल्प संपन्न नहीं था जो साधना की सर्वोच्च शिखर पर पहुँच कर समर्पित होता, तो पहाड़ की तराई में ही मैंने सर पटक दी अपना...!
***
समर्पण के बाद साधना की चिंता गुरु/भगवान के सर चली जाती है.. वो स्वयं साधना करवाते चले जाते हैं.. यह मेरा अनुभव है...!
***०***
साधना का शिखर यहीं है कि साधक को यह दिखाई पड़ने लगता है कि कितना भी ऊँचा चढ़े कोई आकाश हमेशा उतना ही ऊँचा रहता है जितना पहले था, उसे छू पाना असंभव है.. परमात्मा को पाना असंभव है.. और खुद को मिटा पाना भी असंभव है.. यह भी परमात्मा की हाथों में ही हैं...!
***

***ओशो के उत्तराधिकारी***
ओशो के जो उत्तर इस काल में होने चाहिए, उन्हें देने का अधिकारी उनका हर शिष्य-शिष्या है.. हर ओशो शिष्य-शिष्या ओशो का उत्तराधिकारी है...!
***
संयास का गैरिक वस्त्र पहनने वाले के भीतर धधकती अग्नि का प्रतीक है, जो हर प्रकार की भीतरी और बाहरी अशुद्धियोँ को जला कर शुद्ध दे ...!
***०***
(Date- 27.10.2016)


Monday, 6 June 2016

अजगर करे न चाकरी.........सबके दाता राम!


जय श्री राम....!
अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम
दास मलूका कह गए, सबके दाता राम!
तुलसी दास जी कहते हैं:
सियाराम मय सबजग जानी!
करहुँ प्रणाम जोरि जुग पानी...!!

राम कौन हैं? राम यह सारा अस्तित्व है। "सबजग जानी".... 
समस्त अस्तित्व, सारा ब्रह्माण्ड ही रामरूप है। 
अस्तित्व क्या है? जिसमें अस्ति का गुण है यानि "जो है"।
सारा अस्तित्व, सारी दुनिया, सारा ब्रह्माण्ड ही राम हैं..
राम ही दिख रहे, राम ही सुनाई पड़ रहे..रूप, रस, स्पर्श, गंध, 
ध्वनि के द्वारा इनकी ही प्रतीति हो रही और जो इन सभी से परे हैं
वह भी राम ही हैं!
जय श्री राम....!!
अन्य आध्यात्मिक एवम् श्री कृष्ण, भगवत गीता और महाभारत से सम्बंधित और पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:-




Tuesday, 31 May 2016

शिव और कृष्ण


शिव परमात्मा के
आत्म रूप में प्रकट हैं..
शुद्ध रूप में प्रकट हैं..
कृष्ण परमात्मा की
लीला रूप में प्रकट हैं..
व्यवहार रूप में प्रकट हैं..
ॐ नम: शिवाय...!
जय श्री कृष्ण...!

अन्य आध्यात्मिक एवम् श्री कृष्ण, भगवत गीता और महाभारत से सम्बंधित और पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:-

Monday, 30 May 2016

जीव को जानें, शिव को जानें.. जगत का कल्याण करें


जीव ही शिव है...!
जबतक जीव शरीर में है
तबतक शरीर का कल्याण है!
परिवार, समाज, देश, दुनिया 
का कल्याण सम्भव है
इसी शरीर, मन, बुद्धि के द्वारा...!
शिवयोग साधना से जीव का साक्षाकार
करके अपरा और परा प्रकृतियों को वश में कर
संसार का कल्याण करें...!
*
ॐ नमः शिवाय...!
ॐ नमः जीवाय....!
***
***
Soul is Shiva...!
Up till soul remain in body
Body is survived, saved, welfared
in all ways. We can do wwelfare, serve our
family, society, nation, world only till soul existing
in the body, using our same body, mind n intellect.
Let us Realize our Soul by Siyag Sadhana and have 
Control over both Pra and Apradh Natures and 
Serve the world, do all every things for welfare of world.
Om namah shivay...!
Om namah jeevan....!
***

अन्य आध्यात्मिक एवम् श्री कृष्ण, भगवत गीता और महाभारत से सम्बंधित और पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:-